विक्रम संवत 2008 महासुदि 6 के मंगल दिन इस जिनालय की प्रतिष्ठा हुई
17वीं शताब्दी में पूज्य आचार्य श्री विजयहिरसूरीजी महाराज अपने शिष्यों सहित इस पावन तीर्थ की यात्रा पर पधारे। विक्रम संवत 1666 में, उनके पट्टधर आचार्य श्री विजयसेनसूरीजी के पावन हस्तों से पोष सुदि 6 से महासुदि 6 तक, पूरे एक माह तक अनेक अंजनशलाका प्रतिष्ठाएँ संपन्न हुईं। संयोगवश, ठीक 342 वर्ष बाद, उसी शुभ दिवस—महासुदि […]
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